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इंटरनेट

उपयोग व दुरूपयोग इंटरनेट जो आज की दुनिया में रोटी कपड़ा और मकान जैसा ही जरूरी हो गया है। लगभग हर घर तक पहुंच चुका है। आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है इसलिए यह सहज ही है की आवश्यकता महसूस किए जाने पर ही इसका जन्म हुआ है। अब यह चर्चा करने से पहलेपढ़ना जारी रखें “इंटरनेट”

महत्त्वाकांक्षा

महत्वकांक्षाएं मनुष्य की. पराकाष्ठा को छू गई। ज्ञान व शक्ति के मद में प्रकृति को‌ नष्ट कर गई। पलटवार अब जब उसने किया , पूरा विश्व घायल कर दिया। शक्तिहीन मनुष्य को प्रकृति उसकी जगह दिखा गई। गगन भेदने था तू चला, धरती तुझसे संभाली न गई। आज निर्बल तुझसा ना कोई प्रकृति तुझे दिखलापढ़ना जारी रखें “महत्त्वाकांक्षा”

पतंग

‘पतंग’ सुनने में छोटा सा शब्द और देखने में भी महज एक कागज का टुकड़ा। लेकिन छोटी सी यह पतंग जो जरा सी ही देर में फट जाती है, की अपनी एक लंबी यात्रा है और बरसों पुराना इतिहास है। बच्चों को रंग बिरंगी पतंगों के प्रति उत्सुक होते हुए पतंग उड़ाते हुए हमेशा देखापढ़ना जारी रखें “पतंग”

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